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Dil-e-Halaat
Thursday, 4 February 2016
मेरे हाथों की लकीरो में...
मेरे हाथों की लकीरो में लिखी है किस्मत मेरी...
और मेरी ही किस्मत पे मेरा बस नहीं।।
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दिलासा देते हैं लोग..
हसते में रुला देता है...
हथेली पर रखकर नसीब अपना...
मुझे ऊंचाइयों पर देखकर...
शिकवे आँखों से गिर पड़े वरना ...
किसी ने मोल न पुछा इस दीवाने दिल का ...
बरसो से बरसती है...
याद है मुझे मेरे सारे गुनाह
इश्क़ कोन सा जरूरी है..
मंजिल पे है फिर भी चले जा रहे है..
मेरे हाथों की लकीरो में...
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