skip to main
|
skip to sidebar
Home
|
Contact
|
Dil-e-Halaat
Sunday, 14 February 2016
हथेली पर रखकर नसीब अपना...
हथेली पर रखकर नसीब अपना...
क्यों हर शक्श मुकद्दर ढूंढता है।
अजीब फितरत है उस समुन्दर की...
टकराने के लिए पत्थर ढूंढता है।
0 comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Labels
Dard-e-Dil
Two Line
More...
▼
2016
(11)
▼
February
(11)
दिलासा देते हैं लोग..
हसते में रुला देता है...
हथेली पर रखकर नसीब अपना...
मुझे ऊंचाइयों पर देखकर...
शिकवे आँखों से गिर पड़े वरना ...
किसी ने मोल न पुछा इस दीवाने दिल का ...
बरसो से बरसती है...
याद है मुझे मेरे सारे गुनाह
इश्क़ कोन सा जरूरी है..
मंजिल पे है फिर भी चले जा रहे है..
मेरे हाथों की लकीरो में...
Powered by
Blogger
.
Dil-e-Halaat
© Designed by:
Yadavml
0 comments:
Post a Comment