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Dil-e-Halaat
Wednesday, 17 February 2016
दिलासा देते हैं लोग..
दिलासा देते हैं लोग... की यूँ हर वक़्त न रोया करो...
मैं कैसे बताऊँ की कुछ दर्द सहने के क़ाबिल नहीं होते।
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दिलासा देते हैं लोग..
हसते में रुला देता है...
हथेली पर रखकर नसीब अपना...
मुझे ऊंचाइयों पर देखकर...
शिकवे आँखों से गिर पड़े वरना ...
किसी ने मोल न पुछा इस दीवाने दिल का ...
बरसो से बरसती है...
याद है मुझे मेरे सारे गुनाह
इश्क़ कोन सा जरूरी है..
मंजिल पे है फिर भी चले जा रहे है..
मेरे हाथों की लकीरो में...
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