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Dil-e-Halaat
Sunday, 14 February 2016
मुझे ऊंचाइयों पर देखकर...
मुझे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग...
पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे।
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दिलासा देते हैं लोग..
हसते में रुला देता है...
हथेली पर रखकर नसीब अपना...
मुझे ऊंचाइयों पर देखकर...
शिकवे आँखों से गिर पड़े वरना ...
किसी ने मोल न पुछा इस दीवाने दिल का ...
बरसो से बरसती है...
याद है मुझे मेरे सारे गुनाह
इश्क़ कोन सा जरूरी है..
मंजिल पे है फिर भी चले जा रहे है..
मेरे हाथों की लकीरो में...
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